Search This Blog

Follow by Email

Wednesday, October 23, 2013

Ek Mann (One Psyche)


 सवालों में क़ैद-सा,
उलझनों में मुस्तैद-सा,
एक आवारा-सा मन,
उड़ चला परिंदों संग।

ख़ुद पर यूँही बेमतलब इठलाता-सा,
अपनी ही दुनिया में घबराता-सा,
ख़ुद को कभी समेटता और,
कभी यूँही बिखराता-सा।

कभी सपनों के रंग देखकर,
तो कभी उनके टूटने के ढंग देखकर,
ईश्वर के समक्ष सिर झुकाता-सा,
एक मन यूँही बेवजह मुस्कुराता-सा।



Copyright © 2013 Ankita Kashyap

Thursday, July 25, 2013

Zindagi ke Rang (Colors of Life)


 An oldie that I posted on facebook page on March 30, 2013

ये भी क्या ज़िद है,
एक मुट्ठी में आसमान को,
बसाने की जद्दोजहद,
यूँही ज़िंदगी क्या कोई कम बेरंग है,
जो तुम बचे-ख़ुचे रंग भी,
उस आसमान को उधार देने चले हो?

एक-दो ही रंग सही,
पर हैं तो तुम्हारे पास,
फ़िर कल का क्या भरोसा,
वो तो हर पल बाज़ार में बिकता है,
मेहनत भी सबकी, सपने भी सबके,
और खामखाँ की ज़िद भी सबकी,
लेकिन 'कल' सिर्फ़ रंगीन घरों तक ही पहुँचता है।

तुम्हारी, मेरी बेरंग दुनिया,
तो सिर्फ़ आज और अभी देख सकती है,
सुन सकती है, महसूस कर सकती है,
कल तो यहाँ ब़स क़िताबों में बसता है,
रेहड़ी पर चमकदार चीज़ लगाकर,
मुट्ठी में आसमान नहीं समाता है,
उधारी पर रंग देने से,
ब्याज़ दर ब्याज़ नया रंग नहीं चढ़ जाता है।

* * *

मेहनत भी सबकी, सपने भी सबके,
और ज़िद भी सबकी,
फ़िर कल का क्या भरोसा,
वो तो हर पल बाज़ार में बिकता है,
इसलिए ही, मैं क्यों अपने हठ से पीछे हटूं?
क्यों मेरे हिस्से की ज़मीं,
और मेरे हिस्से का आसमान,
यूँही किसी को भी ले जाने दूँ?
मेरे रंग मेरे अपने हैं,
न मैं उधार पे इन्हें किसी को दे सकता हूँ,
न मुझसे कोई ये ले सकता है,
ये जद्दोजहद तो ब़स मेरे उन अपने रंगों को,
पहचानने की होड़ भर है।

फ़िर क्या पता मेरे रंगों को,
ढूंढता हुआ कोई 'कल' ख़ुद यहाँ आ जाए,
और अगर नहीं भी आया तो क्या पता,
मेरे रंग और चमकदार हो जाएँ,
मेरी ज़मीन और मेरा आसमान,
रंगीन घर भी बनवा पाएं,
वर्ना तो ज़िंदगी ऐसे भी कम बेरंग नहीं !


Copyright © 2013 Ankita Kashyap

Heya!

Truly long time!

Would be updating poems frequently. However, you can follow my page on facebook where I have somehow updated more frequently in past one year.

The facebook link is: https://www.facebook.com/PoemShots

Thanks for keeping up all this time.

Love.

Saturday, September 1, 2012

The Knight in Shining Armor


Oh! dark deep night you are enticing,
you take me through with coziness,
in pain's silhouette alley,
I see the darkness,
but its not frightening,
I sense the ghosts,
but I am not fear-dying,
I dodge wildness,
with all uncanny sense of courage,
but, I disguise from the humanity,
in the name of selfish rage.
I am not walking slowly either,
or going with a sprinting speed,
I have found my own knight in the shining armor,
well! it was hidden within,
I fought my fears,
and, I did not let my head sunk with despair,
I showed the grace of a fighter,
the fighter with the brave heart,
and a cool mind,
the fighter who never gave up,
even in the darkest of the times.
Copyright © 2013 Ankita Kashyap

Saturday, August 25, 2012

Judgments


People kept judging him and his work,
as per their experiences of life,
he kept working,
as was told by the omnipotent guy.
Does that make him or the people,
culprit in any sense?
It was just a little,
'communication gap' game,
where everyone's prejudices,
played the tricks and changed rules,
else life was in the end,
dream, love, learn and work!
 
Copyright © 2013 Ankita Kashyap